दुनिया में सबसे अधिक भारतीय प्रवासी, देश में आए 78.6 अरब अमेरिकी डॉलर: संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट

भारत विश्व में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों का सबसे बड़ा मूल देश बना हुआ है जिसके विभिन्न देशों में 1.75 करोड़ प्रवासी हैं। देश को विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा भेजी गयी सबसे अधिक 78.6 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि प्राप्त हुई। यह बात संयुक्त राष्ट्र की प्रवासी एजेंसी ने कही है।

‘द इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन’ (आईओएम) ने अपनी रिपोर्ट ‘ग्लोबल माइग्रेशन रिपोर्ट 2020 में कहा कि 2019 में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या अब 27 करोड़ होने का अनुमान है और प्रवासियों के लिए शीर्ष स्थल अमेरिका बना हुआ है जहां करीब 5.1 करोड़ प्रवासी हैं। आईओएम ने अपनी नवीनतम वैश्विक रिपोर्ट में कहा कि समग्र आंकड़ा विश्व की जनसंख्या का बहुत छोटे से हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, यद्यपि यह दो वर्ष पहले प्रकाशित हुई उसकी पिछली रिपोर्ट के मुकाबले इसमें 0.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।

आईओएम ग्लोबल माइग्रेशन रिपोर्ट 2020 में कहा गया, ”यह आंकड़ा विश्व की जनसंख्या का बहुत छोटा सा हिस्सा (3.5 प्रतिशत) है। इसका यह अर्थ है कि वैश्विक आधार पर बहुत अधिक संख्या (96.5 प्रतिशत) में लोगों के उसी देश में रहने का अनुमान है जहां उनका जन्म हुआ है।” संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के अनुसार सभी अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों में से आधे से अधिक (14.1 करोड़) यूरोप और उत्तर अमेरिका में रहते हैं। एक अनुमान के अनुसार 52 प्रतिशत पुरुष हैं और सभी प्रवासियों में से करीब दो तिहायी को काम की तलाश है, यह संख्या 16.4 करोड़ बैठती है।

भारत विश्व में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों का सबसे बड़ा मूल देश बना हुआ है। देश के सबसे अधिक संख्या (1.75 करोड़) में प्रवासी विदेशों में कार्यरत हैं। इसके बाद मेक्सिको का नम्बर आता है जहां के 1.18 करोड़ लोग और चीन के 1.07 करोड़ प्रवासी अन्य देशों में हैं। शीर्ष स्थल देश अमेरिका बना हुआ है जहां 5.07 करोड़ अंतरराष्ट्रीय प्रवासी रहते हैं।

इसमें यह भी कहा गया कि 2018 में अंतरराष्ट्रीय धन प्रेषण भी बढ़कर 689 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। तीन शीर्ष धन प्रेषण प्राप्त करने वालों में भारत (78.6 अरब अमेरिकी डॉलर), चीन (67.4 अरब अमेरिकी डॉलर) और मेक्सिको (35.7 अरब अमेरिकी डॉलर) हैं। अमेरिका शीर्ष धन प्रेषित करने वाला देश हैं जहां से 68.0 अरब अमेरिकी डॉलर भेजे जाते हैं। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (44.4 अरब अमेरिकी डॉलर) और सऊदी अरब (36.1 अरब अमेरिकी डॉलर) है।

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