झारखंड के अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की नौकरी जाना तय

झारखंड के 3508 अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को हटाया जाएगा। केंद्र सरकार इन्हें दोबारा मौका नहीं देने का निर्णय लिया है और इस संबंध में राज्य सरकार को निर्देश जारी कर दिया है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया था कि 31 मार्च 2019 के बाद किसी भी स्कूल में अप्रशिक्षित शिक्षक नहीं रहेंगे। चाहे वह स्कूल सरकारी हो या निजी। इसके बाद मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को डीएलएड करने के लिए एक साल का मौका देने की अपील केंद्र से की थी, लेकिन केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि 31 मार्च 2019 के बाद कोई शिक्षक अप्रशिक्षित नहीं रहेंगे।

केंद्रीय स्कूली शिक्षा व साक्षरता मंत्रालय की निदेशक राशि शर्मा ने सभी राज्यों के शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि अगस्त 2017 में ही सभी राज्यों को स्पष्ट कर दिया गया था कि 31 मार्च 2019 के बाद स्कूलों में कोई अप्रशक्षित शिक्षक नहीं रहेंगे।

निर्धारित तिथि से शिक्षकों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता  डीएलएड रखी गई है। केंद्र  के निर्देश के बाद स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग अगले एक-दो दिन में सभी जिलों को इस संबंध में कार्रवाई का निर्देश देने की तैयारी कर रहा है। जिला संबंधित शिक्षकों को सेवा से मुक्त करने की कार्रवाई करेगा।

अप्रैल से ही मानदेय किया गया है बंद- 
अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों का मानदेय अप्रैल महीने से ही बंद है। नेशनल स्कूल ऑफ ओपेन स्कूलिंग  की ओर से आयोजित डीएलएड की परीक्षा में ये पास नहीं कर सके थे। 3508 में 1053 पारा शिक्षक फेल हो गये थे, जबकि 2455 पारा शिक्षक डीएलएड के लिए क्वालिफाइ ही नहीं कर सके थे।

जून 2019 में परिणाम आने और एनआईओएस की रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग ने मानदेय पर रोक लगा दी है, हालांकि संबंधित पारा शिक्षक फिलहाल स्कूल में कार्यरत हैं। उधर, निजी स्कूलों के करीब 6,200 शिक्षक भी डीएलएड पास नहीं कर सके थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1631774total sites visits.